कहानियां ..

बहुत हैं कहानियां  लोगो को बताने ,
चले बस तो मैं सारी गा कर सुनाऊँ,
मिले तो मुझे  कोई क़दरदान ज़रा
मुस्कान का मुखौटा उतार कर दिखाऊं।

गीत भी संगीत भी सब साथ है यहाँ ,
मीत भी मिले तो वो बातें सुनाऊँ ,
जो बिन बोले मेरे हाल ये समझ ले,
उसे मैं बिठा के , हाल – ए – दिल सुनाऊँ …..

कि किस्सों में मेरे  ज़रा पागलपन है,
सुनाते सुनाते मैं मन मन मुस्काऊँ …..
मिले तो कोई ज़रा पागल सा मुझको ,
बिना माथा पीटे जिसे मैं समझा पाऊं …

ये बारिश ये मौसम तो हैं बस बहाने,
मैं तो धूप  में भी  ये किस्सा सुनाऊँ ,
मिले तो मुझे  कोई क़दरदान ज़रा
मुस्कान का मुखौटा उतार कर दिखाऊं।

– आयुष :’)

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