Film review : Commando2 (The black money trail)


Film : Commando 2

Release date : 3 march 2017

Cast : Vidyut jamwal, Esha gupta, Adil hussain, Freddy daruwala, Adah sharma

Story : Suresh nair

Screenplay : Ritesh shah

Direction : Deven bhojani

Language : Hindi

कहानी-

कहानी की शुरुवात होती इंडिया के बड़े-बड़े व्यापारियों का ब्लैक मनी हैंडल करने वाले विक्की चड्डा ( अनूप सिंह ठाकुर) की मलेशिया में गिरफ़्तारी से। विक्की को वापिस इंडिया लाने के लिए इंडियन होम मिनिस्टर लीला चौधरी (शेफाली शाह) अपनी एक स्पेशल टीम मलेशिया भेजतीं हैं। विक्की की पत्नी मारिया (ईशा गुप्ता) स्पेशल सेल ऑफिसर करनवीर सिंह (विद्युत जमवाल) को अपने अतीत की कहानी सुनाकर उसे और विक्की को सुरक्षित बैंकॉक पहुँचाने की बिनती करती है। करन, एसीपी बख्तावर खान (फ़्रेड्डी दारूवाला) और साइबर सेल स्पेशलिस्ट ज़फर हुसैन (सुमित गुलाटी) को बन्दूक की नोक पर रखकर उनके  सामने से विक्की, मारिया और एनकाउंटर स्पेशलिस्ट इंस्पेक्टर भावना रेड्डी (अदा शर्मा) को लेकर फरार हो जाता है। क्या बख्तावर करन को पकड़ पाएगा? क्या करन, मारिया और विक्की को इंडिया ले जाने में कामयाब होगा या फिर वह दोनों उसे चकमा देकर निकल जाएंगे? इससे आगे जानने के लिए आपको सिनेमाघर का रुख करना पड़ेगा।

Review-

मार्शल आर्ट्स और बॉडी बिल्डिंग के लिए मशहूर विद्युत् जामवाल ने इस कड़ी की पहली फिल्म कमांडो में अपने एक्शन सीन्स से सबको चौंका दिया था। उनके बारे में कहा जाता है कि वह अपने सारे स्टंट्स खुद ही करते हैं। फिल्म काफी दिनों से सुर्खियों में बनी हुई है, आइये जानते है फिल्म किस हद तक दर्शकों की उम्मीद पर खरी उतरी।

पटकथा- फिल्म की कहानी सुरेश नायर की है और इसके स्क्रीनप्ले और डॉयलोग्स का निर्माण किया है इसी फिल्म की पिछली कड़ी ‘कमांडो’ के लेखक रितेश शाह ने। कहानी में कुछ भी नयापन नहीं है। एक मुजरिम जो कि देश से बाहर है उसे वापिस देश लाने वाली कहानियाँ पता नहीं कब बंद होगीं। अगर आपको एक ही कहानी को बार-बार दिखाना है तो निश्चित तौर पर स्क्रीनप्ले पर अच्छा काम करना चाहिए था पर वह भी नहीं किया गया। डॉयलोग्स इतने कमजोर हैं जो आपको भावनात्मक रूप से जोड़ने की बजाय परेशान करने लगेंगे।

निर्देशन- देवेन भोजानी आमतौर पर टीवी सीरीअल्स के निर्देशन के लिए जाने जाते हैं। फिल्म का निर्देशन करने के लिए शायद अभी उन्हें और इंतेजार करना होगा। एक्शन सीन्स छोड़कर अगर पूरी फिल्म की बात की जाए तो निर्देशन एवरेज से भी नीचे था। किरदारों का सही से इस्तेमाल ही नहीं किया गया। कमजोर निर्देशन अगर उबासियाँ लेने पर मजबूर कर दे तो कोई बड़ी बात नहीं होगी।

अभिनय- विद्युत् जामवाल को एक्शन सीन्स के साथ-साथ अभिनय पर भी ध्यान देना चाहिए। फ़्रेड्डी दारूवाला ने फिल्म हॉलिडे में अच्छा काम किया था, लेकिन इस फिल्म में वो बिल्कुल विपरीत नज़र आए। अदा शर्मा ने अपने चुटकुलों से हँसाने की कोशिश जरूर की लेकिन वह भी बहुत हद तक फैल रहीं। फिल्म के कास्टिंग डायरेक्टर को शायद अभी कलाकारों के बारे में थोड़ी और छानबीन करनी चाहिए। कुछ कलाकार जैसे आदिल हुसैन, प्रकाश बेलावड़ी, सतीश कौशिक आदि ने अपना किरदार हालाँकि ठीक-ठाक अदा किया।

म्यूजिक- म्यूजिक अच्छा है। फिल्म के बीच में तो हालांकि गाने नहीं हैं पर अलग से एल्बम तैयार किया गया है।
अगर आप विद्युत् जामवाल के बहुत बड़े फैन हैं या कुछ 2-3 एक्शन सीन्स का मज़ा उठाना चाहते हैं तो फिल्म जरूर देख सकते हैं, अन्यथा आपको फिल्म देखने के लिए प्रोत्साहित करने की मेरे पास कोई वजह नहीं है।

Rising Stars -2/5

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