कलम🖋

कलम ये मेरे जब तक जी में जान है ,चलती जायेगी .
मैं इसमे ढलता जाऊंगा ,
ये मुझको लिखती जायेगी .

जितनी मुझ में सान्से हैं ,
उतनी स्याही है इस में ,
जितना अनुराग मुझ में है ,
उतना सम्मोहन है इस में .

ये ही मेरी है ज़ुबान,
जो मेरा  अन्तर्मन  लिखती.
जो भी मन में पकता है
वो शब्दों मे परोसती .

मेरे सारे गीत मेरी कलम गाते जायेगी ,
सान्से थमी मान लेना ,
जो मेरी कलम रुक जायेगी .

आयुष 🙂

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