Movie Review: Raees

 

Image source-Internet

Film: Raaes

Release date: 27 January

Cast: Shahrukh Khan, Nawazuddin Siddiqui, Mahira Khan, Atul Kulkarni, Mohammed Zeeshan Ayyub.

Story : Rahul Dholakia, Harit Mehta, Ashish Vashi, Niraj Shukla

Directed By: Rahul Dholakia

Language: Hindi

कहानी-

बचपन में जब रईस की माँ (शीबा चड्डा) ने रईस (शाहरुख़ खान) से कहा कि “कोई धंधा छोटा नहीं होता और धंधे से बड़ा कोई धर्म नहीं होता” उसी पल रईस ने तय कर लिया कि उसकी जिंदगी का मकसद सिर्फ और सिर्फ व्यापार करना है। वह बचपन से ही अपने दोस्त सादिक़ (मोहम्मद ज़ीशान अय्यूब) के साथ मिलकर जयराज (अतुल कुलकर्णी) के लिए काम करना शुरू कर देता है। बड़े होकर जब खुद का व्यापार करने का ख्याल दिमाग में आता है तो इस काम में उसकी मदद करता है मुम्बई का रहने वाला मूसा भाई। उसके बाद रईस पलटकर नहीं देखता। वह पड़ोस में रहने वाली आशिया (माहिरा खान) से शादी करता है और शराब के व्यापार में डूब जाता है। और फिर उसकी मुश्किलें बढ़ाने आता है  ए.सी.पी जयदीप अम्बालाल मजूमदार (नवाज़ुद्दीन सिद्दकी)। पूरे फतेहपुरा को शराबमुक्त करने के चक्कर में मजूमदार का फिर ट्रांसफर कर दिया जाता है पर वह रईस का पीछा नहीं छोड़ता। क्या एसीपी मजूमदार रईस तक पहुँच पाएगा या रईस फिर उसे चकमा देने में सफल रहेगा, इस सवाल का जवाब आपको सिर्फ सिमेनघर ही दे सकता है।

Review-

फिल्म शुरुआत से ही मनोरंजन करने में सक्षम है। छोटी-छोटी गलियों से गुजरती कहानी अंत तक एक बड़ा रूप ले लेती है। फिल्म में हिन्दू-मुस्लिम एकता का छोटा सा नज़ारा देखने को मिलता है। मुख्य किरदारों के अलावा अन्य किरदार भी उतना ही मनोरंजन करते नज़र आये। गांधी जी का चश्मा चुराने वाला दृश्य मजेदार है। छोटे रईस और उसके दोस्त सादिक़ का काम भी सराहनीय है।

निर्देशन– एक लंबे अरसे के बाद राहुल ढोलकिया ने निर्देशन में वापिस कदम रखा है। कसा हुआ निर्देशन अंत तक बाँध कर रखता है। एक्शन सीन्स को भी अच्छे से शूट किया गया है। इसके लिए एक्शन डायरेक्टर रवि वर्मा की भी तारीफ़ बनती है। यह फिल्म राहुल के लिए अहम साबित हो सकती है।

पटकथा-  कहानी अच्छी है। जब लोग इस तरह की फिल्म देखने बैठते हैं तो वह सिर्फ मनोरंजन चाहते हैं। किसी बायोपिक की तरह उन्हें सच्चाई से कोई लेना देना नहीं होता। और शायद इसी ख्याल को दिमाग में रखकर कहानी का निर्माण किया गया है। कहानी हमें हँसाती है और कहीं-कहीं भावुक भी करती है। “गुजरात की हवा में व्यापार है साहिब, मेरी साँस तो रोक लोगे पर इस हवा को कैसे रोकोगे” जैसे डॉयलोग्स अच्छे हैं।

अभिनय: शाहरुख़ खान ने निश्चित तौर पर फिल्म के लिए मेहनत की है। उनके किरदार को खूब पसंद किया जा रहा है। माहिरा खान ने भी अपना रोल सही ढंग से अदा किया है। थिएटर में जिस कलाकार का तालियों से स्वागत हो उसकी अदाकारी के बारे में कुछ कहना उचित नहीं होगा। वह हैं नवाज़ुद्दीन सिद्दीकी। हमेशा की तरह तेज-तर्राट और अपने किरदार में डूबे हुए नवाज़ ने एक बार फिर बेहतर अभिनय का परिचय दिया। मोहम्मद ज़ीशान अय्यूब ने रांझणा की तरह इस बार भी एक अच्छे दोस्त की शानदार भूमिका अदा की। अतुल कुलकर्णी भी जयराज के रूप में अच्छे लग रहे हैं।

संगीत: संगीत ठीक है। कुछ गानों में और अच्छा हो सकता था। राम संपथ ने रमन-राघव को भी अच्छा संगीत दिया था। लैला और ज़ालिमा पहले ही हिट हो चुके हैं। उड़ी-उड़ी जाए भी अच्छा है।

अच्छे अभिनय और एक्शन से भरपूर रईस एक बार देखने जरूर जा सकते हैं।

Rising Stars- 4/5

Leave a Reply

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out / Change )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out / Change )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out / Change )

Google+ photo

You are commenting using your Google+ account. Log Out / Change )

Connecting to %s

Create a website or blog at WordPress.com

Up ↑

%d bloggers like this: