Film review-Kaabil: The mind sees All

Film: Kaabil

Release date: 25 January

Cast: Hrithik roshan, Yami gautam, Ronit roy, Rohit roy.

Written by: Sanjay masoom, Vijay Kumar mishra

Directed by: sanjay gupta

Language: Hindi   
कहानी-

“हम कमजोर नहीं हैं, बस इंसान का खुद पर भरोसा होना चाहिए” इसी उद्देश्य के साथ फिल्म की शुरुआत होती है। कहानी का मुख्य किरदार रोहन भटनागर ( ऋतिक रोशन) कहानी की नायिका सुप्रिया शर्मा ( यामी गौतम) से मिलता है, दोनों एक दूसरे को पसंद करते हैं और शादी कर लेते हैं। फिर एक दिन जब वह अपने घर वापिस लौट रहे होते हैं तब रास्ते में अमित शेलर ( रोहित रॉय) और उसका दोस्त रोहन और उसकी बीवी से बदतमीज़ी करते हैं जिसके जवाब में रोहन उसे थप्पड़ मार देता है और उस थप्पड़ का जवाब देने के लिए अमित और उसका दोस्त दोनों मिलकर सुप्रिया की कमजोरी का फायदा उठाकर उसके साथ ज़्यादती करते हैं। कहानी में मोड़ तब आता है जब रोहन को पता चलता है कि अमित और उसके दोस्त ने एक बार फिर उसी घिनोनी हरकत को अंजाम दिया। इसके बाद रोहन खोखले पुलिस तंत्र और अमित के बड़े भाई,राजनेता माधवराव शेलर ( रोनित रॉय)  से बदला लेने के लिए खुद को काबिल बनाता है। आगे की कहानी जानने के लिए आपको सिनेमाघर का रुख करना पड़ेगा।     

Review- 

अगर साफ़ तौर पर कहा जाए तो कहानी साधारण किन्तु खूबसूरत हैं। यह कहानी आपने निश्चित तौर पर पहले भी देखी होगी, अंतर सिर्फ इतना है कि इसमें कहानी के दोनों ही मुख्य किरदार देख नहीं सकते। राजनेताओं के दबाव में काम करते पुलिसवालों की स्थिति दिखाने का बड़ा तो नहीं किन्तु थोड़ा प्रयास जरूर किया है। कम समय में अच्छी फिल्म दिखाने के प्रयास में कुछ गलतियां जरूर हुईं पर सिनेमेटोग्राफी की जितनी तारीफ़ की जाए उतनी कम है। नए- नए प्रयास देखने को मिलते हैं।
निर्देशन- संजय गुप्ता ने अच्छा काम किया है। उनकी पिछली फिल्म जज़्बा ने अच्छा व्यवसाय किया था इसलिए इस फिल्म से उन्हें उम्मीद ज्यादा होगी। शुरुआत में फिल्म थोड़ी कमजोर नज़र आती है पर उसे निर्देशक के मत्थे जड़ना ठीक नहीं होगा। कई बार स्क्रीनप्ले और निर्देशन का सामंजस्य नहीं बैठ पाता और नतीज़न सीन में कुछ कमियां रह जाती हैं। हालाँकि संजय अगर इस बात पर ध्यान देते तो फर्स्ट हॉफ थोड़ा कमजोर होने से बच जाता।

पठकथा- कहानी साधारण हैं जबकि लोग कुछ आसाधारण देखना चाहते हैं। फर्स्ट हॉफ पर थोड़ा और काम करने की जरुरत थी। सुरेश मासूम और रोनित रॉय के किरदार को और इस्तेमाल किया जा सकता था। सेकंड हाफ पर अच्छा काम किया गया है। डायलॉग्स फिल्म के हिसाब से सही हैं। “अगर हम भी यही सोचेंगे कि लोग क्या सोचेंगे तो फिर लोग क्या सोचेंगे”मजेदार है। 

अभिनय- ऋतिक और यामी ने अच्छा अभिनय किया है। सुरेश मेनन भी हमें गुदगुदाते हैं। रोनित हमेशा की तरह बेहतर लगे। रोहित थोड़ा और बेहतर कर सकते थे। गिरीश कुलकर्णी ने दंगल की तरह इस बार भी लाजवाब काम किया है। 

संगीत- संगीत अच्छा है। हालाँकि कोरियोग्राफी गानों के हिसाब से नहीं हुई पर ठीक है। मोर अमोर, कुछ दिन, काबिल हूँ अच्छे हैं। हसीनों का दीवाना में उर्वशी का काम सराहनीय है।

बेहतर सिनेमेटोग्राफी और बेहतर अभिनय के लिए फिल्म को एक बार जरूर देखा जा सकता है। पर अगर आप कुछ बहुत ही आसाधारण कहानी देखना चाहते हैं तो यह फिल्म आपके लिए नहीं है।

Rising Stars- 3.5/5

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