Film review- Ok Jaanu

 

Film: Ok Jaanu

Release date: 13 January

Cast: shraddha kapoor, Aditya roy kapoor, Naseeruddin shah

Story: Mani ratnam

Directed by: Shaad ali

Language: Hindi

कहानी- फिल्म की कहानी उसके दो मुख्य किरदार तारा (श्रद्धा कपूर) और आदि (आदित्य रॉय कपूर) के इर्द-गिर्द घूमती है। आदि मुम्बई अपने भैया के सीनियर वकील गोपी अंकल( नसीरुद्दीन शाह) के घर पर रहने के लिए आता है। जहाँ उसकी मुलाकात होती है तारा से। दोनों के बीच दोस्ती होती है और फिर प्यार। किसी तरह आदि गोपी को मनाकर तारा को अपने साथ लिव इन रिलेशनशिप में रहने की इजाज़त लेता है और फिर दोनों साथ-साथ रहने लगते हैं। जहाँ तारा अपने माँ-बाप की शादी टूटने की वजह से शादी नहीं करना चाहती वहीं आदि का भी शादी करने का कोई इरादा नहीं है। किंतु जब तारा का पेरिस और आदि का यू.स जाने का वक्त नजदीक आता है तो दोनों को एक दूसरे से दूर हो जाने का डर सताने लगता है। आदित्य तारा से शादी करने की बात करता है।  क्या तारा आदित्य से शादी करेगी या फिर अपने आर्किटेक्ट बनने के सपने को पूरा करेगी? इस सवाल का जवाब जानने के लिए आपको सिनेमाघरों का रुख करना पड़ेगा।

Review-

कहानी में कुछ भी नयापन नहीं है। फिल्म में जिस तरह दो लोगों को मिलते दिखाया गया है यदि ऐसा सच में संभव होने लगे तो हर दिन हज़ारों रिश्ते बेवजह ही बनने लग जाएंगे।फिल्म के मुख्य किरदार रोज मिलते हैं,सफर करते हैं, कहीं घूमने जाते हैं और इसी तरह बिना हाथ-पैर वाली फिल्म ख़त्म हो जाती है। फिल्म में कहीं-कहीं आप हँसते हैं लेकिन अगले ही पल फिल्म पता नहीं किस दिशा में मुड़ जाती है। लिव इन रिलेशनशिप जैसी कोई भी चीज फिल्म में देखने को नहीं मिलती। कहानी वैसी ही बढ़ती है जैसा आप अगले पल का अनुमान लगाते हैं और बिना किसी निष्कर्ष के खत्म हो जाती है।

निर्देशन- निर्देशक शाद अली और मणि रत्नम का रिश्ता काफी पुराना हैं। दरअसल शाद ने अपने निर्देशन की पारी की शुरुआत मणि रत्नम की तमिल फिल्म alaipayuthey के हिंदी रीमेक साथिया से की थी जो कि सुपर हिट रही थी। उनकी पिछली फिल्म किल दिल फ्लॉप रही थी इसलिए बेशक उन्हें इस फिल्म से काफी उम्मीदें होंगी, लेकिन कमजोर निर्देशन शायद एक बार फिर उनके अरमानों पर पानी फेर सकता है।

पटकथा- ओके जानू मणि रत्नम की ही तमिल फिल्म O kadhal manmani की हिंदी रीमेक है। कहानी किसी भी प्रकार से सक्षम नज़र नहीं आती। न तो पूरी तरह मनोरंजन ही करती है और न ही भावनात्मक रूप से हमें जोड़ पाती है। गुलज़ार साहब ने हालाँकि गीत तो अच्छे लिखे हैं पर डॉयलोग्स कमजोर रह गए।

अभिनय- नसीरुद्दीन शाह को छोड़कर हर कलाकार के अभिनय में कमी नज़र आई। आदित्य की पिछली फिल्म भी बॉक्स ऑफिस पर कुछ कमाल नहीं कर पायी थी। उन्हें अभिनय पर ध्यान देने की जरुरत है। श्रद्धा कपूर को भी यह बात समझ लेनी चाहिए की फिल्म की सफलता के लिए सिर्फ क्यूटनेस नहीं अदाकारी का भी आना जरुरी है।

म्यूजिक-ए आर रहमान ने काबिल-इ-तारीफ़ काम किया है। टाइटल ट्रैक अच्छा है। हम्मा पहले ही हिट हो चुका है। इसके अलावा एन्ना शोणा भी लाज़वाब है।

अगर आप आदित्य या श्रद्धा के बहुत बड़े फैन हैं और कहानी आपके लिए मायने नहीं रखती है तो बेशक ये फिल्म आपके लिए है। वरना आप कल रिटर्न ऑफ़ जेंडर केज का रुख कर सकते हैं।

Rising stars- 2/5

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