एक खयाल

हर सवाल का जवाब मिलना मुमकिन नहीं
कुछ उलझनों को उलझा रहने दिया जाए ;
जो बीत गई वो बात गई
आखिर कब तक उसे याद किया जाए ;
भलाई है हकीकत को अपना लेने में
एहसास-ऐ-गम को कब तक महसूस किया जाए ;
हाल में तुम मौजूद नहीं, मुस्तकबिल का मालूम नहीं
क्यों न तुम्हें तसव्वुर में शामिल किया जाए ;
हर दास्तान को मंज़िल नसीब हो यह ज़रूरी नहीं
जो अधूरा है उसे अधूरा ही रहने दिया जाए ;
अधूरी कहानियों में भी सिमटी अपनी अलग खूबसूरती है
उन्हें उनके हाल पर ही छोड़ दिया जाए ।

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